छत्रपति शिवाजी महाराज की भवानी तलवार को लेकर सवाल हर किसी के मन में उठता है|लोकमान्य तिलक के समय से ही यह चर्चा बिच-बिच में होते ही रहते हैं,लेकिन देखा जाय तो यह तलवार इंग्लैंड के बैंकिंग हैण्ड में आज भी है|आज हम आपसे छत्रपति शिवाजी महाराज के भवानी तलवार के रहस्य बारे में बात करने जा रहे हैं|
लोकमान्य तिलक ने यह्ताल्वर को हमारे देश में लाने की कोशिश करनी चाही ऐसी कबिता राम गणेश गडकरी ने लिखी थी|1980 में बा.अब्दुल रहमान अंतुले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे|तब इन्होने इस तलवार को यही लेन की धोषणा किये थे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पाया|यह तलवार चर्चा में तब आई जब केंद्र में भाजपा की सरकार आई|साल 2002 में केंद्रीय गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी पांच दिन के लिए स्पेन के दौरे पर गए थे|उस समय स्पेन के कुछ लोगो ने बताया कि शिवाजी महाराज की भावना तलवार स्पेन के तोलेदो ये शस्त्र निर्मिती के लिए जाने जानेवाले शहरों के करागीरों ने बनाई है|
अगर देखा जाये तो बखर और काव्यों के आधार पर खुद माँ भवानी ने शिवाजी महाराज को तलवार दी लेकिन ये तलवार मतलब माँ भवानी ने शिवाजी महाराज को दर्शन दिया और आशीर्वाद दिया कि मैं तेरी तलवार बन के रहूंगी, ऐसा शिवभारत इस काव्य में लिखा है|वैसे शिवाजी महाराज के पास कई तलवारे थी|इसमें से एक तलवार इनके पिता शाहजी महाराज ने दिए थे जिसका नाम तुलजा रखा गया था और दुसरे तलवार का नाम जगदंबा रखे थे|अब सवाल यह है कि फ़िलहाल यह तलवार कहाँ है|
लगभग 90 साल पहले मुंबई के कॅप्टन बहादुर मोदी नाम का किसी एक आदमी ने भवानी तलवार मेरे पास है ऐसा दावा किया था|उन्होंने ये भी कहा कि इस तलवार के ऊपर शिवाजी महाराज का नाम लिखा है, लेकिन बाद में पता चला कि शिवाजी महाराज का नाम उसी व्यक्ति ने लिखा था|रियासतकारों के मुताबिक रायगढ़़ में जितने के बाद भवानी तलवार औरंगजेब के हाथ लगी थी जो उसने बाद में शाहू महाराज के विवाह में उन्हें भेट दी थी, जो उसके बाद शाहू महाराज के विवाह में उन्हें भेट दे दिए|
इसका मतलब यह है कि वह तलवार सतारा में होना चाहिए|उनके वंशज उदयनराजे भोसले है| 1974 में बाबासाहेब पुरंदरे ने मुंबई में शिवसृष्टि का प्रदर्शन किये थे, जहाँ भवानी तलवार है लेकिन ज्येष्ठ इतिहास संशोधक ग. ह. खरे ने उन्हें इस तलवार पर लिखा लेख पढ़कर दिखाया, जिससे यह साबित होता है कि यह तलवार भवानी तलवार नहीं है|
भवानी तलवार कैसी थी किसी को पता नहीं है| इतिहास संशोधक ग. ह. खरे के मुताबिक भवानी तलवार का वर्णन आज भी उपलब्ध नहीं है|कवींद्र परमानंद के शिवभारत और हरी कवि के शंभूराजे चरित्र में इसका उल्लेख आया है लेकिन इसकी लंबाई,चौड़ाई,उसका नुकीलापन, उसकी मुठ,पोलाद और निशान इसके बारे मे कुछ भी नहीं है|
लोकमान्य तिलक ने यह्ताल्वर को हमारे देश में लाने की कोशिश करनी चाही ऐसी कबिता राम गणेश गडकरी ने लिखी थी|1980 में बा.अब्दुल रहमान अंतुले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे|तब इन्होने इस तलवार को यही लेन की धोषणा किये थे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पाया|यह तलवार चर्चा में तब आई जब केंद्र में भाजपा की सरकार आई|साल 2002 में केंद्रीय गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी पांच दिन के लिए स्पेन के दौरे पर गए थे|उस समय स्पेन के कुछ लोगो ने बताया कि शिवाजी महाराज की भावना तलवार स्पेन के तोलेदो ये शस्त्र निर्मिती के लिए जाने जानेवाले शहरों के करागीरों ने बनाई है|
अगर देखा जाये तो बखर और काव्यों के आधार पर खुद माँ भवानी ने शिवाजी महाराज को तलवार दी लेकिन ये तलवार मतलब माँ भवानी ने शिवाजी महाराज को दर्शन दिया और आशीर्वाद दिया कि मैं तेरी तलवार बन के रहूंगी, ऐसा शिवभारत इस काव्य में लिखा है|वैसे शिवाजी महाराज के पास कई तलवारे थी|इसमें से एक तलवार इनके पिता शाहजी महाराज ने दिए थे जिसका नाम तुलजा रखा गया था और दुसरे तलवार का नाम जगदंबा रखे थे|अब सवाल यह है कि फ़िलहाल यह तलवार कहाँ है|
लगभग 90 साल पहले मुंबई के कॅप्टन बहादुर मोदी नाम का किसी एक आदमी ने भवानी तलवार मेरे पास है ऐसा दावा किया था|उन्होंने ये भी कहा कि इस तलवार के ऊपर शिवाजी महाराज का नाम लिखा है, लेकिन बाद में पता चला कि शिवाजी महाराज का नाम उसी व्यक्ति ने लिखा था|रियासतकारों के मुताबिक रायगढ़़ में जितने के बाद भवानी तलवार औरंगजेब के हाथ लगी थी जो उसने बाद में शाहू महाराज के विवाह में उन्हें भेट दी थी, जो उसके बाद शाहू महाराज के विवाह में उन्हें भेट दे दिए|
इसका मतलब यह है कि वह तलवार सतारा में होना चाहिए|उनके वंशज उदयनराजे भोसले है| 1974 में बाबासाहेब पुरंदरे ने मुंबई में शिवसृष्टि का प्रदर्शन किये थे, जहाँ भवानी तलवार है लेकिन ज्येष्ठ इतिहास संशोधक ग. ह. खरे ने उन्हें इस तलवार पर लिखा लेख पढ़कर दिखाया, जिससे यह साबित होता है कि यह तलवार भवानी तलवार नहीं है|
भवानी तलवार कैसी थी किसी को पता नहीं है| इतिहास संशोधक ग. ह. खरे के मुताबिक भवानी तलवार का वर्णन आज भी उपलब्ध नहीं है|कवींद्र परमानंद के शिवभारत और हरी कवि के शंभूराजे चरित्र में इसका उल्लेख आया है लेकिन इसकी लंबाई,चौड़ाई,उसका नुकीलापन, उसकी मुठ,पोलाद और निशान इसके बारे मे कुछ भी नहीं है|

Comments
Post a Comment